पच्चीस साल बाद/नीलिमा शर्मा
पच्चीस साल बाद (लघुकथा-संग्रह)
नीलिमा शर्मा
प्रकाशक
वनिका पब्लिकेशन्स
रजि. कार्यालय : एन ए-168, गली नं-6, विष्णु गार्डन, नई दिल्ली-110018
मुख्य कार्यालय : सरल कुटीर, आर्य नगर, नई बस्ती, बिजनौर-246701, उ.प्र
फोन: 09412713640
Email: contact@vanikaapublications.com
vanikaa.publications@gmail.com
Website: www.vanikaapublications.com
ISBN 978-93-49084-56-8
9789349084568
शीर्षक: पच्चीस साल बाद
©: नीलिमा शर्मा निविया
संस्करण: प्रथम 2026 मुखावरण : विनय माथुर मूल्य : दो सौ अस्सी रुपये $ 28
मुद्रक : प्रतीक प्रिंटर्स, दिल्ली
अनुक्रम
सुबह की चाय / 21
डिटॉक्स / 22
मैरिज मटिरियल / 24
आग / 25
समय की दोलन गति / 26
काला धन / 27
तेरी मेरी महँगाई / 28
आईना / 29
आइटम / 30
निश्चय / 31
परवरिश / 32
संवाद / 34
एक्सपर्ट / 36
खुशबू / 37
बोल भी इब / 39
दुनियादारी / 40
जिंदगी आजकल / 41
अपने अपने / 42
निवेश / 43
खाली मुट्ठी / 44
शनिवार के इंतज़ार में / 45
यादें / 47
झुमकी / 48
हाशिये का हक / 50
तन्हाई / 52
कौन-सा देश मेरा / 54
बदलाव / 55
एक बार फिर / 57
कल और आज और कल / 59
फिर से पोक / 61
सच का सामना / 63
कालर आय डी वाला फोन 65
कड़वी मगर सच्ची / 67
पच्चीस साल बाद / 68
असली नकली चेहरे / 69
लिखत पढ़त / 71
घरनामा / 72
किताबी पढ़ाई / 74
विकास / 75
सिंधारा / 76
फ्यूचर मम्मा / 78
चिड़ियाँ दा चंबा / 79
प्रतिज्ञा/ 81
रुलाई/ 82
प्रतिशोध/ 84
मूल से सूद प्यारा/ 86
पैसा वसूल/ 87
मन के हारे हार/ 88
लेन-देन/ 89
पाचन शक्ति/ 91
क्रांति या जुनून/ 93
अभिजात्यता/ 95
बगुला भगत/ 96
कमबख्त नींद !/ 97
कशमकश/ 99
तीज/ 100
लौटना/ 101
कड़वा करवा/ 102
समझ/ 103
किन्नर ही तो था/ 104
फिर क्या होगा?/ 105
कत्ल/ 106
चरित्र/ 107
घर का वातावरण/ 109
किसका स्वर्ग/ 110
बड़ी वाली लेखिका/ 111
दिल का सुकून / 112
साज सज्जा / 113
ग्रहण / 114
घर की चीखें / 115
तेरा होना या न होना / 117
उतना ही / 119
भोजन या शिक्षा / 120
तलाश / 121
रहिमन काकी / 122
नियम / 124
दिन विशेष / 125
अभिलाषा / 126
मन और समाज का आईनाः
नीलिमा शर्मा की लघुकथाएँ / 127
नीलिमा शर्मा की रचनाओं
का स्वतंत्र संसार / 129
लघुकथाओं की बड़ी दुनिया / 131
लघुकथा की संवेदना को
छूता लेखन / 132
संवेदना और आत्मचिंतन के
रूप में सृजित लघुकथाएँ / 134
इंसानियत की सच्चाईयों को
उजागर करती लघुकथाएँ / 138
छोटी बातें, गंभीर असर / 139
आत्मकथ्य
लघुकथाएँ हमेशा से मुझे इसलिए आकर्षित करती रही हैं, क्योंकि वे कम शब्दों में जीवन के बड़े सत्य कह देती हैं। क्षणिक घटनाएँ, अनकहे अनुभव, मुस्कान और विडंबना ये सब मिलकर ऐसा साहित्य रचते हैं, जो पाठक के मन में देर तक ठहर जाता है। यही कारण है कि लघुकथा-लेखन मुझसे कभी दूर नहीं गया, बस कहानियाँ थीं, जो समय-समय पर स्वयं मुझे पुकारती रहीं और अपने शब्दों में ढलने का आग्रह करती रहीं। लघुकथाएँ आज भी डायरी के पन्नों में साँसें लेती हैं।
मेरी लघुकथा यात्रा की शुरुआत 2012 से हुई थी उसके बाद 'मुट्ठी-भर अक्षर' (लघुकथा साझा संग्रह) के संपादन की शुरुआत हुई, जिसमें तीस रचनाकारों की लघुकथाएँ शामिल थीं। वह पुस्तक मेरे लिए एक सीख, एक उत्साह और एक गहन अनुभव थी। उसी ने मुझे विश्वास दिया कि शब्दों के छोटे-छोटे बीज भी साहित्य की बड़ी फसल उगा सकते हैं।
इस नए संग्रह की रचनाएँ भी जीवन के उन्हीं रंगों से जन्मी हैं। ममता और व्यथा से लेकर विडंबना और उम्मीद तक। हर कहानी के पीछे कोई दृश्य, कोई संवाद, कोई चुभन या कोई अनोखी गर्माहट रही है, जिसने मेरी कलम को दिशा दी। समाज का बदलता स्वरूप, रिश्तों की नई परिभाषाएँ और तकनीक से प्रभावित मानवीय संबंध इन सबने इन कथाओं को आकार दिया है।
मैं मानती हूँ कि साहित्य का उद्देश्य केवल घटनाओं का वर्णन नहीं, बल्कि पाठक के भीतर संवेदना को जीवित रखना भी है। यदि इन कथाओं में से कोई भी आपके मन की किसी खिड़की पर हल्की-सी दस्तक दे सके, तो यही मेरे प्रयास का सौभाग्य होगा।
इस पुस्तक की प्रक्रिया में जिन लोगों ने मेरा संबल बनकर साथ दिया, उनका आभार शब्दों में बाँधना कठिन है। विशेष रूप से जितेन्द्र 'जीतू' जी, जिनका आग्रह और विश्वास इस पुस्तक के पीछे एक प्रेरक शक्ति रहा है। साथ ही बलराम अग्रवाल जी, तेजेन्द्र शर्मा जी, सुभाष नीरव जी, रामेश्वर कांबोज जी, जयंती रंगनाथन, नीरज शर्मा दीदी, अंजू शर्मा, आकांक्षा पारे, सपना सिंह, मनीषा कुलश्रेष्ठ, उपमा शर्मा, सीमा सिंह, चित्रा राणा और कांता राय, आप सभी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता।
'अब यह पुस्तक 'पच्चीस साल बाद' पाठकों के हाथों में है। वही इसके भविष्य का निर्णय करेंगे। यदि यह संग्रह आपके मन की किसी पगडंडी पर अपनी छोटी-सी छाप छोड़ सके, तो यही मेरी लेखकीय यात्रा की सार्थकता होगी।
नीलिमा शर्मा निविया
फ्लैट नंबर 609, ब्लॉक A,
रोहिणी हाईट्स, सैक्टर-29
रोहिणी, नई दिल्ली
Ph: 8510801365
नीलिमा शर्मा निविया
नीलिमा शर्मा का जन्म 26 सितंबर को मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) में हुआ। फिर देहरादून में निवास, वर्तमान में दिल्ली में रह रही हैं। उन्होंने अर्थशास्त्र में एम.ए., बी.एड. एवं बी.टी.सी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं।
सृजन के विविध आयामों में सक्रिय नीलिमा शर्मा के अब तक प्रकाशित कहानी संग्रह 'कोई खुशबू उदास करती है', कविता संग्रह- 'शनिवार के इंतजार में', लघुकथा संग्रह- 'पच्चीस साल बाद' और शीघ्र प्रकाश्य कहानी संग्रह- 'देह दिल्ली दिल देहरादून' प्रमुख हैं।
संपादन क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने हिंदी साहित्य के प्रथम डिजिटल साझा उपन्यास 'आईना सच नहीं बोलता' का संयोजन, संपादन एवं सहलेखन किया है। इसके अतिरिक्त 'मूड्स ऑफ लॉकडाउन', 'मुट्ठी भर अक्षर', 'खुसरो दरिया प्रेम का', 'मृगतृष्णा', 'लुकाछिपी', 'हाशिये का हक', 'मन पिंजरा तन बावरा' तथा 'पुरवाई कथा माला' के चार भाग जैसी अनेक पुस्तकों का लेखन और सह-संपादन भी किया है।
उनकी कविताएँ व लघुकथाएँ अनेक प्रतिष्ठित पत्रिकाओं एवं संकलनों में प्रकाशित हुई हैं। कहानी 'बदहवास' का उर्दू अनुवाद पाकिस्तान के समाचार पत्र में प्रकाशित हुआ, जबकि 'टुकड़ा-टुकड़ा ज़िंदगी' का अनुवाद पंजाबी, उर्दू और जापानी भाषाओं में किया गया है। टोक्यो विश्वविद्यालय की पत्रिका में इसका जापानी संस्करण प्रकाशित हुआ। उन्होंने आकाशवाणी दिल्ली से कविता पाठ भी किया है।
साहित्यिक उपलब्धियों के लिए उन्हें अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें प्रतिलिपि कथा सम्मान (2015), मातृभारती साहित्य के उभरते सितारे (2016), ओ.बी.ओ. साहित्य रत्न (2017), साहित्यश्री सम्मान (2018), इंद्रप्रस्थ लिटरेचर फेस्टिवल सम्मान (2019), राधा अवधेश स्मृति कथा पुरस्कार (2023), रामदेवी वागेश्वरी सम्मान (2023) तथा पृथ्वीभान टिक्कू स्मृति सम्मान (2023) प्रमुख हैं।
नीलिमा शर्मा दो वर्षों तक मातृभारती. कॉम की हिंदी संपादक रहीं और वर्तमान में पुरवाई ई-पत्रिका की उप-संपादक हैं।
संपर्क : 8510801365

आपका बहुत बहुत धन्यवाद
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