अविश्वास चक्र (लघुकथा संग्रह)/ सन्तोष सुपेकर

 

                          अविश्वास चक्र                                                         (लघुकथा संग्रह) 

                                 कथाकार                                                              सन्तोष सुपेकर 

Avishwas Chakra (Short Short Story Collection)

© लेखक

ISBN 978-81-981634-5-5

प्रथम संस्करण-2026 

मूल्य- 400/- INR $4.43

प्रकाशक 

अक्षरवार्ता पब्लिकेशंस, उज्जैन (म.प्र.) भारत मो. 9424014366

मुखपृष्ठ एवं डिजाइन-

हेमन्त भोपाळे मो. 7879765090

मुद्रक-

श्री जी ऑफसेट, निकास चौराहा, उज्जैन (म.प्र.) मो. 9827261434

भूमिका

सुपेकर की लघुकथा-दृष्टि

बात सच थी या अफवाह, लेकिन 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान हम सुना करते थे कि होमी जहाँगीर भाभा ने एक ऐसा बम विकसित किया था जो पैटन टैंक पर गिरकर फिरकी की तरह घूमता हुआ उसके अन्दर घुस जाता था और वहाँ फटता था। वीर अब्दुल हमीद ने उनकी बदौलत ही पाकिस्तान के 9 पैटन टैंक अकेले उड़ा दिये थे। सुपेकर की लघुकथाएँ पढ़ते हुए मुझे ऐसा लगता है कुछेक में तो उनकी मेधा भी चकरी की तरह शब्द या वाक्य के भीतर घुसकर स्फोट करती है। कम से कम मुझ जैसा पाठक तो स्फोट की उस आवाज से अनेक बार चौंक ही जाता है। उदाहरण के लिए इसी संग्रह से उनकी अनेक लघुकथाओं के नाम लिये जा सकते हैं। लघुकथा 'डिकोड' तो यथा नाम तथा गुण है ही। उनकी लघुकथाओं में शब्दों और भावों का 'यमक' प्रयोग अक्सर ही मिलता है। यह उनका पसंदीदा स्ट्रोक है। इसमें वे कथानक के अनुरूप करुण और व्यंग्यपरक दोनों प्रकार की अनुभूति पाठक को कराते हैं। 'डिकोड' में यमक का प्रयोग हुआ है। अल्जीरिया में जन्मे फ्रांसीसी दार्शनिक जॉक देरिदा को विखण्डनवाद का जनक माना जाता है। उनका कहना था कि मूलतः भाषा में पूर्व-निश्चित मुख्य-अर्थ की किसी नए अर्थ से विस्थापन की पद्धति का नाम विखण्डन है। गाहे-बगाहे तो ऐसा अनेक लघुकथाकारों में देखने को मिल जाता है; लेकिन बहुतायत में ऐसी लघुकथाएँ सन्तोष सुपेकर के ही पास हैं। इसलिए उन्हें वाक्यों के ही नहीं, शब्दों के भी अर्थ-विस्थापन का प्रमुख या कहें कि अन्यतम लघुकथाकार कहा जा सकता है। प्रकृति ने बहुत-सी विरोधी वस्तुएँ हमें सौंपी हैं। प्रकृति चाहती है कि जिन लोगों को उसने अभिव्यक्ति की शक्ति सौंपी है, वे उन विरोधी वस्तुओं का उपयोग अपनी अभिव्यक्ति में करें। क्या उनकी ओर हमारा ध्यान सहज ही जाता है? उदाहरण के लिए, जिसका नाम 'जल' है, वो आग बुझाने के काम आता है। पूरा अग्निशमन विभाग प्रमुखतः उसके भरोसे खड़ा है।

'इतिहास क्रंदन' उनकी एक यथार्थ कथा है। 'स्याह पृष्ठों का पाठ' में वे एक उनके अंकन का दायित्व निर्वाह करती है। सुपेकर की 'विदेशी भैया' और 'सर्वमान्य' जैसी कथाएँ इसी श्रेणी में गिनी जा सकती हैं। राजनीतिज्ञों की तरह लघुकथाकार 'पलों की चोरी' नहीं करता बल्कि त्यक्त पलों को ग्रहणीय बनाता है, उन्हें 'कथा' होने की संज्ञा और प्रतिष्ठा प्रदान करता है। और कहना गलत न होगा कि सन्तोष सुपेकर त्यक्त पलों को कथा की संज्ञा और प्रतिष्ठा देने में गम्भीरतापूर्वक संलग्न हैं। उन्हें बधाई भी और शुभाशीष भी।

- डॉ. बलराम अग्रवाल

संपर्क : एफ-1703, आर जी रेजीडेंसी, सेक्टर 120,

नोएडा-201301 (उ.प्र.)

मोबाइल : 8826499115

अनुक्रम

1. आरम्भ और अन्त

2. कुछ ही पलों में

3. दरवाजे, दीवारें और छत

4. ब्रोकन विन्डो थ्योरी

5. डिकोड

6. इतिहास क्रंदन

7. अविश्वास चक्र

8. अच्छे अंकल

9. पर्ची

10. इच्छाकल्पित चिन्तन

11. नाद और अनुवाद

12. बातों का कलाईडस्कोप

13. एक रुपया

14. यात्रीगण कृपया ध्यान दें

15. उचित फटकार

16. फीनिक्स

17. अविश्वास पथ पर

18. यष्टि बनाम समष्टि

19. पहली बात

20. चलती हुई लघुकथा

21. स्याह पृष्ठों का पाठ

22. असर

23. लरजती चेतावनी

24. इन मनुष्यों के कारण

25. उल्लेखनीय

26. विदेशी भैया

27. कमाल की प्रजाति

28. लपटों के मध्य

29. अम्मा सुनो ना!

30. पड़े हुए ब्रेक

31. मंडी में उस दिन

32. दूसरा कमेंट

33. लम्बी सीटी

34. डूबे हुए लोग

35. उद्यत

36. मर्जर

37. सुर्ख जवाब

38. फोर्स लैंडिंग

39. बेहतर जीवन के लिए

40. स्क्रीन एजर्स

41. तेरहवां पन्ना

42. 'मख्खन' का पत्थर

43. सोशल मीडिया नहीं

44. स्पीड ब्रेकर

45. सर्वमान्य

46. खुली आँखों की नींद

47. निरापद कोई नहीं

48. मुक्ति

49. छोटे अक्षर

50. उसी तरह नहीं?

51. जो भूलना चाहिए

52. ग्रीन सिग्ग्रल

53. दौड़ और निचोड़

54. सबूत

55. नाइंटीफाइव परसेंट

56. चकित दुःख

57. स्रोत

58. तब तक !

59. 'प्रोसेस'

60. भुगतान

61. नॉस्टेल्जिया का टुकड़ा

62. फितरत भी !

63. कभी-कभी, अभी भी

64. बगैर चश्मे के

65. आह और वाह

66. खड़े हुए लोग

67. पहली बार

68. आवश्यकता

69. एक्सपायरी डेट

70. भोला सौदा

71. आत्ममुग्ध और आत्मक्षुब्ध

72. पहला विकल्प

73. प्रस्फुटन

74. अपराधबोध की वह सुबह

75. दुर्लभ होता संबोधन

76. आखिरी घूँट

77. यह फोन

78. डिलीटेड मैसेज

79. परसों शाम

80. साहित्यिक दर्द

81. उन्नीस लोग

82. लघुकथा के बागी स्वर

83. परख

84. मन नहीं करता

85. निस्पृहता

86. बात कुछ और

87. फिर पागल !

88. प्रस्वेद संस्कार

89. उंगलियां तीन ही

90. पंक में पंकज

91. सेलरी

92. ईव

93. जीत की वापसी

94. करोड़ों को तरजीह

95. साहित्यकार हो न !

96. बाद में आये लोग

97. हारता हुआ 'लेकिन'

98. बस और बेबस

99. फुल स्टॉप

100. कुपित छाया चित्रक

101. जवाब लाजवाब

102. गर्म चाय

103. भाड़ा

104. घड़ी और घड़ी

105. ए.टी.पी.

106. मिलता जुलता मामला

107. परतें खुलते ही

108. सौ के पाँच नोट

109. खारेपन की मिठास

110. मुझसे ज्यादा

111. साक्षात्कार के दौरान-1

112. साक्षात्कार के दौरान-2

113. सिन्टोला

114. कूल ड्राय प्लेस

115. फायदा ही फायदा

116. पलायन वेग

117. सिर्फ अभिमन्यु

118. रेंज में


संतोष सुपेकर

जन्म : 29 जून 1967 को उज्जैन में।

शिक्षा : बी. कॉम., एम.ए. (हिन्दी साहित्य), आई.टी.आई., पत्रकारिता, जनसंचार तथा कम्प्यूटर विज्ञान में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, (PGDJMC, PGDCA)

लेखन के क्षेत्र में प्रथम बार 1979 में विद्यालय की पत्रिका 'जागृति' में कहानी प्रकाशित। वर्ष 1986 से सतत पत्रलेखन, कविता, लघुकथा, व्यंग्य, कहानी एवं समीक्षा लेखन में भी सक्रिय। आकाशवाणी उज्जैन एवं इन्दौर, इंटरनेट रेडियो 'बोल हरियाणा बोल' तथा हिन्दी क्लब, रेडियो शिकागो पर कविताएँ, लघुकथाएँ एवं साक्षात्कार प्रसारित। मॉरीशस, नीदरलैंड, कैलिफोर्निया, ऑस्ट्रेलिया से भी रचनाएँ प्रकाशित।

पुरस्कार एवं सम्मान : दैनिक भास्कर एवं इंडिया टुडे द्वारा (दो बार वर्ष 1989 में एवं 2013 में)

सर्वश्रेष्ठ पत्र लेखक पुरस्कार। लघुकथा लेखन के लिए कई पुरस्कार जिसमें पाँच बार कथादेश (नई दिल्ली) की अ.भा. लघुकथा प्रतियोगिता के पुरस्कार शामिल। लघुकथाएँ मराठी, मलयालम, बांग्ला, गुजराती, तेलुगु, अंग्रेजी, कन्नड़, सिंधी, उड़िया, असमिया, उर्दू (मालवी, अवधी, मैथिली, गढ़वाली बोली) एवं पंजाबी के अतिरिक्त नेपाली एवं रूसी भाषा में भी अनूदित। कविताएँ भी मराठी, अंग्रेजी, मलयालम भाषा में अनूदित। रेल मंत्रालय भारत सरकार द्वारा लघुकथा संग्रह 'बंद आँखों का समाज' पर प्रेमचंद कथा सम्मान। इसी संग्रह के लिए भोपाल का अंबिका प्रसाद दिव्य रजत अलंकरण। 1983 में स्थापित 'क्षितिज' संस्था का प्रथम लघुकथा समग्र सम्मान, 2025 में इसी संस्था का 'क्षितिज लघुकथा शिखर सम्मान'। कई लघुकथाओं एवं कविताओं पर ऑडियो, वीडियो पोस्टर एवं शॉर्ट फिल्म्स निर्मित। मध्यप्रदेश लेखक संघ भोपाल द्वारा दो बार, 2011 एवं 2023 में पुरस्कृत। सरल काव्यांजलि संस्था उज्जैन द्वारा सम्मानित। 'अपकेन्द्रीय बल' लघुकथा संग्रह पर हैदराबाद का आचार्य कृष्णदत्त हिन्दी लघुकथा सम्मान। अजमेर (राजस्थान) की संस्था शब्दनिष्ठा के अखिल भारतीय आचार्य विद्यानुग स्मृति लघुकथा पुरस्कार सहित अनेक पुरस्कार और सम्मान। विशेष : महाराष्ट्र राज्य शिक्षा बोर्ड के कक्षा 10वीं के पाठ्यक्रम में दो लघुकथाएँ, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, कोट्टायम (केरल) के स्वशासी सेंट थॉमस कॉलेज, पलाई, कोट्टायम के बी. कॉम. प्रथम वर्ष में लघुकथा और नागपुर के आर.टी.एम. विश्वविद्यालय के बी. एससी. द्वितीय वर्ष के हिन्दी पाठ्यक्रम में कविता शामिल। लघुकथा कलश (पटियाला) द्वारा स्वयं के लघुकथा अवदान पर आलेख। साहित्य अकादमी, म.प्र. द्वारा लघुकथा संग्रह 'सातवें पन्ने' की खबर पर जैनेन्द्र कुमार जैन स्मृति पुरस्कार। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन में श्रीमती अनिता मेवाड़ा द्वारा 'मालवांचल की लघुकथा परम्परा और सन्तोष सुपेकर का प्रदेय' पर शोध कार्य जारी। श्रीमती वैशाली चारथल द्वारा नागपुर के आर.टी.एम. विश्वविद्यालय में लघुकथाओं का अध्ययन। श्रीमती विद्यावती पाराशर द्वारा आर.एन.टी. विश्वविद्यालय भोपाल में शोध कार्य सम्पन्न। पिथौरागढ़ एयरपोर्ट के मौसम अधिकारी लवकुश कुमार द्वारा 15 लघुकथाओं पर वेबसाइट तैयार। वागीश संस्था (दुबई) द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय लघुकथा प्रतियोगिता में निर्णायक, जयपुर साहित्य संगीति द्वारा 2023 एवं 2024 में जारी देश के श्रेष्ठ साहित्यकारों की सूची में शामिल।

प्रकाशित कृतियाँ : लघुकथा संग्रह- 1. साथ चलते हुए, 2. हाशिए का आदमी, 3. बंद आँखों का समाज (मराठी संस्करण, 'डोळस पण अंध समाज'), 4. भ्रम के बाजार में, 5. हंसी की चीखें, 6. सातवें पन्ने की खबर, 7. अपकेन्द्रीय बल, 8. प्रस्वेद का स्वर, क्षिप्रा बैंके गंगा पर्यन्तो (कोलकाता से प्रकाशित संकलन में 20 लघुकथाएँ बांग्ला में अनूदित), डॉ. चन्द्रेश छतलानी एवं श्रीमती कल्पना भट्ट द्वारा 56 लघुकथाओं का अंग्रेजी अनुवाद Selected Laghukathas of Santosh Supekar प्रकाशित। 9. प्रस्तुत लघुकथा संग्रहः अविश्वास चक्र, 

संपादन- 1. शब्द सफर के साथी (लघुकथा फोल्डर-2013) 2. अविराम साहित्यिकी (बरेली, उत्तरप्रदेश) का श्रीकृष्ण 'सरल' विशेषांक, 3. अनाथ जीवन की लघुकथाएँ, 4. उत्कण्ठा के चलते (लघुकथा साक्षात्कार-2021), 5. सरल पथगामी, 6. अन्वीक्षण (लघुकथा आलेख, समीक्षाएँ), 7. त्रिवेन्द्रम (केरल) से प्रकाशित 'चयनित हिन्दी लघुकथाएँ' में सलाहकार सम्पादक। 

काव्य संग्रह- 1. चेहरों के आरपार, अंग्रेजी संस्करण Across the Faces कोलकाता से 2019 में प्रकाशित, 2. यथार्थ के यक्ष प्रश्न, 3. नक्कारखाने की उम्मीदें,

सम्प्रति - दैनिक जनटाईम्स में साहित्य सम्पादक। सरल काव्यांजलि तथा म.प्र. लेखक संघ, उज्जैन से संबद्धता।

सम्पर्क : 31, सुदामा नगर, आगर रोड, उज्जैन। 

santoshsupekar29@gmail.com

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