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करवटें बदलते रिश्ते-2023 / पवित्रा अग्रवाल

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लघुकथा-संग्रह  : करवटें बदलते रिश्ते कथाकार  : पवित्रा अग्रवाल  © सर्वाधिकार सुरक्षित प्रकाशक की पूर्व अनुमति के बिना इस प्रकाशन का कोई भी हिस्सा, किसी भी रूप में या किसी भी प्रकार से इलेक्ट्रॉनिक मशीन, या फोटोकॉपी या रिकॉर्डिंग द्वारा प्रतिलिपित या प्रेषित नहीं किया जा सकता।  विशेष सूचना इस पुस्तक में लिखित साम्रगी लेखक / लेखिका के अपने विचार है, जिसके लिए प्रकाशक उत्तरदायी नहीं होगा। स्वत्वाधिकार : पवित्रा अग्रवाल प्रथम संस्करण: 2023 ISBN: 978-93-95503-89-1  मूल्य : रु: 250.00/- (पेपर बैक) प्रकाशक / विपणक इंडिया नेटबुक्स प्राइवेट लिमिटेड  मुख्यालय :  सी- 122, सेक्टर 19, नोएडा, 201301 गौतमबुद्ध नगर (एन. सी. आर. दिल्ली ) फोन: +91120437693,  मोबाइल +919873561826  ई-मेल: indianetbooks@gmail.com  website: www.indianetbooks.com Associate Company: India Netbooks LLC 3726 Hunters Point Street San Antonio TX 78230 USA Phone: +919873561826 Email:inbllcusa@gmail.com आवरण सज्जा : विनय माथुर  मुद्रितः बालाजी ऑफसेट, दिल्ली- 110032 शीर्षक मेरी ल...

रोटी का सफर (2023) / श्याम सुन्दर दीप्ति (डाॅ.)

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लघुकथा-संग्रह  : रोटी का सफर   कथाकार  :  श्याम सुन्दर  दीप्ति (डाॅ.) © लेखक पहली बार : 2023 सहयोग राशि : ₹100/- प्रकाशक : प्रेरणा प्रकाशन, अमृतसर।  फोन : 98159 26489 मुद्रक : मंज़िला प्रिट पैक, अमृतसर  अनुक्रम ● मैं लघुकथा पर काम करता हूँ / श्याम सुन्दर  दीप्ति ● तेवर की तस्वीर (लघुकथा की प्रयोगात्मक प्रस्तुति) 1. सुबह का इन्तजार 2. चौराहे पर 3. मील पत्थर 4. मौन का एक वार्तालाप 5. तलाश 6. नर्सिंग होम का दर्द 7. असली दुश्मन 8. बहती सड़क  9. बार्डर अन्दर बार्डर 10. अचानक 11. धन्यवाद 12. प्रशंसा 13. कविता का चेहरा 14. खुशगवार मौसम 15. बड़ा दिन 16. 'अ' और 'इ' की दास्तान 17. स्वागत 18. सपने की तस्वीर 19. सिर पर चेहरा 20. आपने आप से परे 21. ऐलान 22. शवगृह से ● तस्वीर के तेवर (लघुकथा के नए प्रसंग) 1. सामना 2. सलीका 3. खेल 4. पहली बार 5. रोटी का सफर 6. स्वर्ग का बोझ 7. मां और कोयल 8. राहत 9. पार्क 10. बिखरी गठरी 11. बिजूका 12. तमन्ना 13. शीशा 14. रिश्तों की महक 15. दीक्षा 16. एक जैसे दो कप 17. शार्पनर 18. जवाब 19. नाइटी 20. दर्द काल मैं लघुकथा पर क...

'झंकृति' (लघुकथा-विशेषांक)/कुँवर प्रेमिल (अ.सं.)

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( डाॅ. कुंवर प्रेमिल द्वारा प्रेषित ) 'झंकृति' त्रैमासिक पत्रिका (लघुकथा-विशेषांक) अक्तूबर-दिसंबर 2001 से जनवरी-मार्च 2002 संयुक्तांक पूर्णांक-13-14, वर्ष - 5 प्रेरणा  : स्व. रामखेलावन पाण्डे संरक्षक : डॉ. शुकदेव सिंह, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी सम्पादक : डॉ. शशि प्रभा सिन्हा अतिथि सम्पादक :  कुँवर प्रेमिल  सम्पादन सहयोग : श्रीमती कनकलता श्री श्रीनाथ सिंह  सम्पादकीय एवं समस्त पत्र व्यवहार का पता मनोरम राजेन्द्र पथ, धनबाद सहयोग राशि : एक प्रति - 20 रुपये  सम्पादन - संचालन प्रकाशन : अवैतनिक - अव्यावसायिक स्वत्वाधिकार  : डॉ. शशि प्रभा सिन्हा प्रकाशक : डॉ. शशि प्रभा सिन्हा नागफनी प्रकाशन, 'मनोरम' राजेन्द्र पथ, धनबाद पिन- 826001  मुद्रण  : विपिन प्रिन्टिंग प्रेस कतरास रोड, धनबाद रचना के लिए रचनाकार उत्तरदायी रेखांकन : मनीष कुमार डा. शशिप्रभा सिन्हा के लिए डा. शशिप्रभा सिन्हा द्वारा प्रकाशित तथा डा. शशिप्रभा सिन्हा के लिए विपिन प्रिंटिंग प्रेस, बैंक मोड़, धनबाद में मुद्रित और 'मनोरम' राजेन्द्र पथ, धनवाद से प्रकाशित। अनुक्रम संपादकीय /  डा....

प्रेरणा अंशु (लघुकथा-विशेषांक) / वीरेश कुमार सिंह (सं.)

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प्रेरणा- अंशु  (समग्र चिन्तन का राष्ट्रीय मासिक)   वर्ष - 37  अंक- 04   जून 2023 संस्थापक: स्व. प्रताप सिंह सम्पादक: वीरेश कुमार सिंह / 08979303333 कार्यकारी सम्पादक: पलाश विश्वास / 06398418084 संयुक्त सम्पादक : रूपेश कुमार सिंह / 09412946162 उप सम्पादक: जे. एम. सहदेव / 09458158500 सम्पादन सहयोग : समीर चन्द्र राय / 09837443783 राघवेन्द्र कुमार / 09758466255 व्यवस्थापक :  गीता सिंह / 08533838765 प्रसार : अनुज कुमार सिंह / 09639651260 मुद्रण सहयोग :  प्रदीप मंडल, ज्योतिष राय, इमरान खान सम्पादकीय कार्यालय : समाजोत्थान संस्थान, वार्ड नं.3, दिनेशपुर, ऊधम सिंह नगर (उत्तराखण्ड) पिन-263160  email -prernaanshu@gmail.com ------------------------------------------------------- ● स्वामी, प्रकाशक व मुद्रक वीरेश कुमार सिंह द्वारा उपकार प्रिन्टिंग प्रेस, गदरपुर, ऊधम सिंह नगर से मुद्रित एवं समाजोत्थान संस्थान, वार्ड नं 3 दिनेशपुर (ऊधम सिंह नगर) से प्रकाशित । ● सम्पादन व प्रकाशन पूर्णतः अवैतनिक । ●आलेखों में व्यक्त विचार लेखकों के अपने हैं जिनसे प्रकाशक/संपादक क...

मन / डॉ. पूरन सिंह

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लघुकथा-संग्रह : मन   कथाकार  : डॉ. पूरन सिंह ISBN No :- 978-93-94275-14-0 प्रकाशक : कुटुम्ब प्रकाशन ए-721, शास्त्री नगर, नई दिल्ली-110052 दूरभाष : 7827713075  e-mail : kutumbprakashan@gmail.com संस्करण..2023 मूल्य :120.00 रुपए (पेपरबैक) @डॉ. पूरन सिंह मुख्य आवरण सज्जा......संदीप राशिनकर मुद्रक..:वि.को. प्रिंटर्स, दिल्ली वैधानिक चेतावनी  इस पुस्तक का सर्वाधिकार सुरक्षित है। लेखक की लिखित अनुमति के बिना इसके किसी भी अंश को फोटोकॉपी एवं रिकॉर्डिंग सहित इलेक्ट्रोनिक अथवा मशीनी किसी भी माध्यम से अथवा ज्ञान के संग्रहण एवं पुनर्प्रयोग की प्रणाली द्वारा किसी भी रूप में पुनरुत्पादित अथवा संचा रित प्रसारित नहीं किया जा सकता। प्रस्तुत पुस्तक के घटनाक्रम, पात्र, भाषा-शैली एवं स्थान सभी लेखक की कल्पना है, किसी भी प्रकार के वाद-विवाद के लिए प्रकाशक का सहमत होना अनिवार्य नहीं है। भूमिका मेरे प्रिय एवं आत्मीय शिष्य डॉ. पूरन सिंह दलित साहित्य के एक चिर-परिचित हस्ताक्षर हैं, उनकी रचनात्मक प्रतिभा लघुकथा, कहानी एवं कविताओं के क्षेत्र में अनेक संग्रहों के अंदर देखी जा सकती है। लघुकथा मे...

अपने लोग /डॉ. प्रभाकर शर्मा - पं. आनन्द चतुर्वेदी (

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 (संतोष सुपेकर द्वारा प्रेषित) श्री निराला साहित्य मण्डल उज्जैन एक परिचय  श्री निराला साहित्य मण्डल उज्जैन का गठन 15 अक्टूबर 1961 को सर्वश्री राजेन्द्र शर्मा, कृष्ण गोपाल द्विवेदी, गिरिराजसिंह राणावत, महेश शर्मा की मंडली ने किया तथा दादा चिंतामणि उपाध्याय ने इस गठन की विधिवत् घोषणा की। डॉ शिवमंगल सिंह 'सुमन' और आचार्य गुरुवर राममूर्ति त्रिपाठी ने निराला साहित्य मंडल, उज्जैन के संरक्षक बनने की स्वीकृति प्रदान की । तत्कालीन अध्यक्ष बाबूलाल कोठारी जी के संपादन में 'विशाला' तथा 'प्रेरणा' काव्य संकलन  श्रीयुत आनंद चतुर्वेदी के संपादन में प्रकाशित हुआ। मंडल द्वारा आयोजित परिचर्चा, परिसंवाद, निबंध प्रतियोगिता के सफल आयोजन भी मंडल की देन रहे । निराला साहित्य मंडल के प्रयासों से सूर्यकांत त्रिपाठी निराला कृत सरस्वती वंदना 'वीणा वादिनि वर दे' की रिकार्डिंग करवाकर तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एस. राधाकृष्णन ने आकाशवाणी के दिल्ली केन्द्र से कई वर्षों तक प्रातःकालीन सभा का आयोजन करवाया जो अनेक वर्षों तक निरंतर जारी रहा । निराला साहित्य मंडल के कार्यक्रमों में वरिष्ठ साहित...

लघुकथा वृत्त मई-जून 2021/ कांता रॉय (सं.)

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लघुकथा वृत्त मई-जून 2021 संयुक्तांक *** दिल्ली विशेषांक  के 20 पृष्ठों में दिल्ली लघुकथा का सम्पूर्ण परिदृश्य *** अनुक्रम  :  पृष्ठ संख्या - 4 *** आलेख - लघुकथा में समालोचना का भविष्य : रामेश्वर कांबोज 'हिमांशु' साहित्य की सारी विधाएँ, सभी साहित्यकार निष्पक्ष चिन्तन और तटस्थ मूल्यांकन से ही परखे जा सकते हैं । जिस साहित्य में पक्षपात और संकीर्ण चिन्तन से ग्रस्त होकर साहित्यकार या कृति का मूल्यांकन किया जाएगा, उसका नुकसान सभी को उठाना पड़ा। सैंकड़ों वर्षों से जिस शोशेबाजी की शुरुआत हुई थी, वह कमोबेश आज तक सभी विधाओं में जारी है । किसी ने मूल्यांकन किया यह कहकर-- सूर सूर, तुलसी शशि , उड़गन केशव दास । अबके कवि खद्योत सम, जहँ- तहँ करत प्रकास ॥ कुछ इनसे भी आगे निकले कि सूरदास सूर्य कैसे हो सकते हैं; सो बात पलट दी गई-- सूर शशि, तुलसी रवि, उड़गन केशव दास । इतना फ़तवा जारी हो गया तो अब अक़्ल से कुछ सोचने के लिए कुछ नहीं बचा । इस हल्लेबाजी में कबीर खो गए। रामचन्द्र शुक्ल ने सूर और तुलसी को आगे बढ़ाया तो खरी-खरी कहने वाले कबीर में मन नहीं रमा । डॉ हज़ारी प्रसाद जी ने कबीर को परखा तो...