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विलोम/अशोक मिश्र

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लघुकथा संग्रह : विलोम कथाकार   : अशोक मिश्र  प्रकाशक   बोधि प्रकाशन  सी-46, सुदर्शनपुरा इंडस्ट्रियल एरिया एक्सटेंशन नाला रोड, 22 गोदाम, जयपुर-302006  फोन : 0141-2213700, 9829018087 ई-मेल : bodhiprakashan@gmail.com कॉपीराइट : अशोक मिश्र प्रथम संस्करण : 2024 ISBN: 978-93-5536-836-2 कम्प्यूटर ग्राफिक्स : बनवारी कुमावत आवरण संयोजन : बोधि टीम मुद्रक : तरु ऑफसेट, जयपुर मूल्य : ₹ 200/- अनुक्रम प्रासंगिक और प्रभावशाली लघुकथाएँ : वेदप्रकाश अमिताभ विविधवर्णी लघुकथाएँ : चित्रेश लघुकथाएं राजा की बात विलोम खानदान बच्चे की मौत रोजगार किसान अंतर अनपढ़ अपराध अवमूल्यन अपराधी आँखें आधार आधारशिला आवास वर्ष उद्योगपति उनका दुख खून की होली ख़ौफ़ गरीब चीनी का रेट जुगाड़ झोपड़ी का अँधेरा डर तब से थाना : एक परिचय दंगा दुकानदारी धन्धा धर्म कौन ? धर्म के नाम पर नशा नए वर्ष की शुभकामनाएँ नाटक निर्दोष नेता पंचायत का न्याय पक्षी से बदतर पढ़ा-लिखा आदमी पुत्र-प्रेम पेट की शिक्षा पैसे से प्रेजेन्ट प्रमोशन बँटवारा बिरादरी में इज्जत बेईमान भविष्य की चिंता भिखारी कौन भिखारी का दान भूखा भ्रष्टाचा...

ठूँठ / गोविन्द शर्मा

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ठूंठ (सौ लघुकथाएँ) कथाकार : गोविन्द शर्मा © : लेखकाधीन प्रकाशक साहित्यागार, धामाणी मार्केट की गली, चौड़ा रास्ता, जयपुर फोन :0141-2310785, 4022382, 2322382, Mob.: 9314202010 e-mail: sahityagar@gmail.com website: sahityagar.com webmail: mail@sahityagar.com प्रथम संस्करण : 2024 ISBN: 978-93-5947-463-2 मूल्य : दो सौ पच्चीस रुपये मात्र फ्लैप-1 व 2 आधुनिक हिंदी लघुकथा के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में झाँककर देखें तो इसने पाँच दशक पूर्ण कर लिए हैं। प्रारंभिक दौर के लघुकथा मनीषियों ने आधुनिक हिंदी लघुकथा का रचना विधान तैयार कर इसे परिभाषित ही नहीं किया बल्कि विधागत सम्मान दिलाते हुए हिंदी साहित्य में एक उचित स्थान दिलाया। इन पाँच दशकों में सैकड़ों लघुकथाकार आए और अपने ज्ञान विवेक व अनुभव सहित हजारों लघुकथाएँ लिखी । इन्हीं शुरुआती दौर के लघुकथा रचनाधर्मियों में एक है- राजस्थान से श्रीमान् गोविंद शर्मा, जो राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय लघुकथाकारों की अग्रिम पंक्ति में खड़े दिखाई देते हैं। श्रीमान् गोविंद शर्मा मूल रूप से बाल साहित्यकार हैं। मगर लघुकथा एवं व्यंग्य लेखन में भी अच्छी पकड़ है...

लघुकथा का साहित्य दर्शन / बलराम अग्रवाल

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लघुकथा का साहित्य दर्शन (आलोचना) बलराम अग्रवाल क्रम भूमिका के बहाने / लघुकथा : अभिव्यक्ति और सृजन / बलराम अग्रवाल आलेख खंड 1. हिन्दी के विकास में लघुकथा का योगदान 2. लघुकथा बाहरी-भीतरी दबायों में सामंजस्य 3. लघुकथा में आधुनिकता-बोध 4. लघुकथा में मूल्य-बोध 5. लघुकथा में युग-बांध 6. लघुकथा में वैयक्तिकता 7. लघुकथा की भाषिक संरचना 8. लघुकथा में लोक-तत्व 9. लघुकथा में भारतीयता 10. लघुकथा सृजन और चुनौतियाँ 11. जन-संघर्ष और तज्जनित..... 12. लघुकथा और आज का समय 13. लघुकथा आनेवाला कल 14. महासागर है लघुकथा साक्षात्कार खंड 15 बलराम अग्रवाल से नेतराम भारती की बातचीत 16 बलराम अग्रवाल से क्षमा सिसोदिया की बातचीत प्रकाशक मेधा बुक्स, नवीन शाहदरा, दिल्ली-110032 / मोबाइल : 98910 22477 मूल्य : रुपए 450 (हार्डबाउंड)

निन्यानवे का फेर / ज्योति जैन

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निन्यानवे का फेर ज्योति जैन ISBN: 978-93-87310-84-1  प्रथम संस्करण : 2019 © ज्योति जैन 1432/24 नंदानगर, इन्दौर - 452 011  चलभाष: 93003-18182  ईमेल: jyotijain218@gmail.com प्रकाशक : शिवना प्रकाशन पी.सी.लैब, सम्राट कॉम्प्लेक्स बेसमेंट बस स्टैंड, सीहोर-466001 (म.प्र)  मोबाइल : 09806162184 (शहरयार) फ़ोन : 07562-405545, 07562-695918 E-mail: shivna.prakashan@gmail.com साज-सज्जा : संजय पटेल : 97525-26881 मूल्य : ₹200/- कथा लघु-अर्थ सुदीर्घ बहुत ख़ामोशी के साथ काम करते रहने का अपना एक आनंद है, तो उसके ख़तरे भी हैं। ख़तरे यह; कि हो सकता है आपका काम अनदेखा ही रह जाए; हो सकता है आपके काम की कहीं भी चर्चा ही न हो। सृजन के इस आत्म-आनंद के अपने ख़तरे होते ही हैं। कला की सारी विधाएँ असल में आत्म-आनंद ही तो हैं, इसीलिए कला की सारी विधाओं के साथ यह दुविधा बनी ही रहती है। ज्योति जैन जी ने अपने लिए आनंद का चयन किया है, और ख़तरों की परवाह अक्सर तो नहीं ही की है। वे कहानीकार हैं, उपन्यासकार हैं, स्तंभकार हैं, कवयित्री हैं और लघुकथाकार तो सबसे पहले हैं ही। साहित्य की लगभग सारी विधाओं को ए...

दूसरे के बोल (प्रतिनिधि लघुकथाएं) / के.पी. सक्सेना 'दूसरे'

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दूसरे के बोल (प्रतिनिधि लघुकथाएं) के.पी. सक्सेना 'दूसरे' ISBN: 978-81-89242-50-3 © के.पी. सक्सेना 'दूसरे' प्रकाशक : अर्चना पब्लिकेशन, ए-5, गली नं. 5-सी, नियर बाबा स्वीट कॉर्नर, पश्चिमी करावल नगर, दिल्ली-110090  मो.: 9818500779 प्रथम संस्करण : 2022 मूल्य : 495.00 परत-दर-परत के बाद... इसके पहले कि आप मेरी रचनाओं पर दृष्टिपात करें मैं इस बात का उल्लेख करना उचित समझता हूँ कि संभव है मेरी ये कथाएँ लघुकथा के निर्धारित मापदण्ड या... आपेक्षित अर्हताएँ पूरी न कर पायें, या यूँ कहूँ कि लघुकथा की कसौटी पर खरी न उतरें, मैंने इन्हें लघुकथा के रूप में ही जाना समझा और बुना है। मेरे अग्रज और लघुकथा में ही अपना पूर्ण कालिक समय देने वाले कथाकारों ने लघुकथा पर न केवल अनेक शोध किये हैं, बल्कि साहित्य जगत को अमूल्य रचनाएँ देकर कथा-साहित्य को समृद्ध भी किया है। उनकी तुलना में ये कथाएँ प्रसंग भी नहीं हैं, किंतु मेरे आस-पास जो गुजरा और उसमें से जो भी कथा के रूप में उकेर सका, उसे आप सब गुणी जनों के समक्ष परोसने का यह साहस इसलिए कर रहा रहा हूँ कि यदि एक भी रचना आपको उस मनःस्थिति तक पहुँचाने में स...

बॉस का डिनर (लघुकथा संग्रह) / डाॅ. महेन्द्र कुमार ठाकुर

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बॉस का डिनर (लघुकथा संग्रह) डाॅ. महेन्द्र कुमार ठाकुर  ISBN: 978-81-970626-3-6 प्रथम संस्करण : 2024 प्रकाशक : अद्विक पब्लिकेशन 41 हसनपुर, आई. पी. एक्सटेंशन पटपड़गंज, दिल्ली 110092 Tel: 011-43510732, 9560397075, ई मेल: advikpublication1@gmail.com Web:www.advikpublication.com © स्वत्वाधिकार : डॉ. महेन्द्र कुमार ठाकुर आवरण : संजय भारद्वाज पुस्तक सज्जा : बिपिन राजभर मूल्य : 240/- लघुकथा का विराट संसार लघुकथा जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह लघु कथा है। लघु अर्थात् छोटी कथा अर्थात् कहानी की कोमलता युक्त कथारस। अर्थात् लघु आकार की कथा यानी कहानी नहीं। वर्तमान में लघुकथा की यह विधा अत्यंत लोकप्रिय हो चुकी है। इसका भविष्य अत्यधिक उज्जवल है। लघुकथा की परिभाषा जो मैंने अपने पूर्ववर्ती लघुकथा संग्रह में दी थीः- लघु आकार का कथात्मकता से युक्त वह गद्यात्मक कथ्य जिसमें स्वयं को लघुतम आकार में अपनी विराटता को व्यक्त करने का सामर्थ्य, कथ्यानुरूप पाठकीय संवेदना को जगाने की क्षमता, विसंगतियों व सामाजिक बुराइयों पर तीक्ष्ण प्रहार करने की सामर्थ्य एवं विराट अनुभूति के दिव्यतम व्यक्तीकरण की योग्यता हो, ज...

धूप में छिपी छाँह / वंदनागोपाल शर्मा "शैली"

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धूप में छिपी छाँह  वंदनागोपाल शर्मा "शैली" ISBN 978-93-93901-11-8 सर्वप्रिय प्रकाशन 1569, प्रथम मंजिल, चर्च रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली-110006 मो. 94253-58748 e-mail: sarvapriyaprakashan@gmail.com आवरण सज्जा : कन्हैया साहू प्रथम संस्करण : 2022 मूल्य : 100.00 रुपये कॉपी राइट : लेखिकाधीन DHOOP MEIN CHHIPEE-CHHAANH BY: VANDANAGOPAL SHARMA 'SHAILEE' Published by Sarvpriya Prakashan 1569, First Floor Church Road, Kashmiri Gate, Delhi-110006 Raipur Office Changora Bhatha, Road Behind Imrald Hotel, P.S. City -492013 Mob.: 9425358748 e-mail: sarvapriyaprakashan@gmail.com First Edition: 2022 Price: Rs. 100.00 अनुभव आजादी का अमृत महोत्सव में शामिल होने जा रहे हैं हम सब... और इसी उपलक्ष्य में आप सबके सामने है प्रस्तुत मेरी लघुकथाएं नये स्वरूप में ... नाम है किताब का 'धूप में छिपी छाँह' आतुर है आप सबका स्नेहाशीष पाने के लिए !! अपने विचारों को संगठित कर किया है नया सृजन लघुकथा के रूप में ... हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहें हैं... परंतु पूर्णतः संतुष्ट भी नहीं है... यह सोचक...